चलते ते तो है साथ-साथ हम
मगर,उम्रभर हात थामनेका तेरा वादा अधूरा रेह गया ..
सफर तो वहिं है बस तुने रास्ता बदल लिया मंजील के पास आकर तुने चलना छोड दिया…
मैफिल तो सजी है आज भी चाँद-सितारों से मगर ,भरी मैफिल में तुने हमें अकेला कर दिया चाँद दामऩ में डालनेंका तेरा वादा अधूरा रेह गया…
हकिकत में तेरा आना नामूमकिन हो गया
सपनों में तेरा सफ़र आज भी जारी है
मगर, हमनें अक्सर सोना छोड दिया
क्यूंकि आँखो में बसनेंका तेरा वादा अधूरा रेह गया…
जिंदगी सें अब शीकायतें नहि खुद से या खुदा से कोईं गिलें नहि
भिगी पलकों कें पीछे जो तेरा साया था वह भी चला गया,रूह में ऊतरनेंका तेरा वादा अधूरा रेह गया…